Friday, October 31, 2008

विष्णु अवतार आडवानी ......आतंकवाद का अंत करेंगे


बचपन मैं एक सवाल मन में कोंधता था की साँप बरसात में इतने ज्यादा क्यों दिखाई देते हैं। पता चला की उनके बिलों में पानी भर जाता है इसलिए वे बिलों से बहार आ जाते हैं। ऐसा ही सवाल आजकल मन में आजकल और कोंध रहा है। सवाल लाल कृष्ण आडवानी जी से जुडा है। सवाल है की आख़िर आतंकवादी बारदात होते ही आडवानी जी कहाँ से प्रकट हो जाते हैं? आप कह रहे होंगे क्या पहेली बुझाने लगा .....


सच में ..... मैं १०-१२ दिन से आडवानी जी को खोज रहा था। टीवी के चैनल बदल बदल कर मैंने रिमोट कंट्रोल ख़राब कर दिया। आख़िर सुनना चाहता था की आडवानी जी हिंदू पवन, हिंदू धर्मेन्द्र और हिंदू राहुल की मराठी विवाद के चलते हुयी मौत पर क्या कहते हैं। सुनना चाहता था की वे हिंदू टर्न मराठी हीरो राज ठाकरे द्वारा महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय घुसपेठियों के ख़िलाफ़ चलाये जा रहे अभियान की क्या व्याख्या करते हैं। गत दिनों आतंकवाद पर उन्होंने कहा था की 'हर मुसलमान आतंकवादी नही पर हर पकड़ा जाने वाला आतंकवादी मुसलमान होता है।' साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के बाद उनके विचारों में क्या अन्तर आया। लेकिन वे कहीं नही दिखायी दिए। कल असाम में बम विस्फोट हुआ आडवानी जी ने तत्काल दर्शन दिए। सभी जगह उनकी प्रतिक्रिया सुनने और पढने को मिली। उन्हें आशंका है की घुसपेठिये बांग्लादेशियों का हाथ बम धमाकों के पीछे हो सकता है। बम विस्फोट होने के बाद काफी तेज चलता है इनका दिमाग। एकदम अनुमान लगा लेते हैं कोन हमलो के पीछे हो सकता है। निशाना भी अर्जुन की तरह लगाते हैं। बस एक ही है लक्ष्य मुस्लिम आतंकवाद का अंत। बंगलादेशी बोले तो .....


मुझे तो लगता है आडवानी जी विष्णु भगवान् के अवतार है । कलयुग में आतंकवाद का अंत करने के लिए ही आडवानी ली ने जन्म लिया है। जैसे राम ने त्रेता युग में रावन का और कृष्ण ने द्वापर युग में कंस का वध करने के लिए अवतार लिया था। यह बात अलग है की कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था कंस बहार था। इसबार कंस जेल में अपना वध होने का इंतजार कर रहा है और कृष्ण बाहर वध करने को बैचेन हैं....आख़िर कलयुग है भाई ........

5 comments:

Rakesh Kaushik said...

kya baat hai hemant ji aapne bilkul durust swal uthaya hai. jab bhi blast hote hai to advani ji apni guess ki potali leke aa phunchte hai.

Rakesh Kaushik

युग-विमर्श said...

एक अकेले अडवाणी जी पर आपका गुस्सा क्यों है. इस दौड़ में तो और भी बहुत से लोग हैं. अडवाणी जी को हिन्दुओं के प्रति ममत्व नहीं प्रर्दशित करना है, वे तो उनसे अथाह प्रेम करते हैं. उन्हें तो केवल मुसलामानों पर क्रोध है, वे उनकी सुनते ही नहीं.

Satyendra PS said...

बहुत सही लिखा है आपने। इस आदमी ने गृहमंत्री के रूप में भी दिखा दिया था कि कोई दम नहीं है। सत्ता में आने के पहले जो भी चिल्ल-पों करते थे, कुर्सी पर बैठते ही खत्म हो गया। आप ही नहीं, मैं भी इसी बात का इंतजार कर रहा था कि हिंदू शिरोमणि का भतीजा जो हत्याएं करा रहा है, इस पर आडवाणी की जुबान क्यों नहीं खुल रही है। इसके साथ ही एक निकम्मा इस पार्टी का अध्यक्ष भी है। इसके इलाके के ही हैं यूपी के जो लोग मारे गए हैं। जनता के बीच कभी वो आदमी गया ही नहीं। यूपी के ४ लोग मारे गए, जुबान में ताला लगा है। थू है ऐसे हिंदूवादी नेताओं पर।

roushan said...

शायद आडवानी जी को धमाकों से बेहद प्रेम है आखिर उन्होंने कह भी दिया है जिन्दा रहेंगे तब विकास होगा.
वैसे भी धमाकों से आडवानी जी को ही फ़ायदा होगा.
ये वर्ड वेरिफिकेशन बड़ा तंग करता है हटा क्यों नही देते?

Unknown said...

हेमंत जी, आप मेरे ब्लाग 'काव्य कुञ्ज' पर आए, टिपण्णी की, इस के लिए धन्यवाद
.
मैं किसी हिंदू को दलित नहीं मानता. कोई किसी को दलित समझे या कहे तो वह दलित नहीं हो जाता. मैं यह मानता हूँ कि सब हिन्दुओं को समान अवसर नहीं मिले. जिन हिन्दुओं ने दूसरे हिन्दुओं को अपने से नीचा समझा और उन्हें समान अवसर नहीं मिलने दिए, उन्होंने हिंदू धर्म की मूलभावना के ख़िलाफ़ काम किया. मेरे विचार में इन लोगों को दलित कहा जाना चाहिए. किसी भी हिंदू को ख़ुद को बड़ा और दूसरे को छोटा कहने का अधिकार नहीं है.

आपने एक व्यक्तिगत प्रश्न पूछा है. मेरे परिवार का कोई सदस्य, कोई रिश्तेदार, कोई मित्र किसी दूसरे हिंदू को दलित नहीं मानता, इस लिए हमारे सवर्ण या किसी को दलित कहने या होने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता. यह कोई कारण नहीं है किसी से रोटी-बेटी का सम्बन्ध जोड़ने या न जोड़ने का.

आपको मेरे लेखों से निराशा होती है यह मेरे लिए दुःख का विषय है. पर मैं अपने सोच के आधार पर लिखता हूँ. मेरे इस सोच का आधार परस्पर प्रेम और आदर है. आपको यह मेरे लेखों में नजर नहीं आता तो यह आपका सोच है.

आपकी वर्तमान पोस्ट पर इतना ही कहूँगा कि प्रेम करो सबसे, नफरत न करी किसी से.