२७ सितम्बर को महत्व क्यों नही ?
२७ सितम्बर को भगत सिंह नामक एक युवक का जन्म हुआ था। लेकिन कितने लोग इस बात को जानते हैं। कैसी विडम्बना है की २७ सितम्बर को देश की सरकार २ अक्टूबर, १४ नवम्बर या १४ अप्रैल के बराबर महत्व नही देती। क्या २७ सितम्बर को जन्मे भगत सिंह का देश की आजादी की लडाई में इतना कम योगदान रहा था की उसे याद ही नही किया जाता। क्या आप जानते हैं उसके बारे में? हाँ जानते होंगे की यह अजय देवगन और बोबी देवोल का किसी सिनेमा में नाम था या रंग दे बसन्ती का अमीर खान ही भगत सिंह था।
यदि भगत सिंह के बारे में कोई जानता भी है तो इतना ही की एक २३ साल का नवयुवक हँसते - हँसते फांसी पर चढ़ गया। अंग्रेज उसे आतंकवादी कहते थे। महात्मा गांधी भी उसे कुछ ऐसे ही शब्दों से सम्मानित करते थे।उसके बारे में आज भी ऐसी ही धारणा है। शायद यही कारण है कि आज भी बहुत कम लोग जानते हैं कि भगत सिंह कब पैदा हुए और कब उन्हें फांसी पर लटका दिया गया। न उसकी याद में छुट्टी होती है न ही उसके जनस दिन को धूमधाम के साथ मनाया जाता है। देश में दर्जनों लोगों के जन्मदिन और पुण्यतिथि बनाई जाती हैं लेकिन भगत सिंह और उसके सहयोगियों को सरकार की और से याद नही किया जाता है। संभवतः किसी भी देश में शहीदों का ऐसा अपमान होता हो। सम्मान देने की बात तो दूर, स्कूलों में उसके जन्मदिन बनाना तो दूर, कई स्कूली किताबों में उसे आज भी आतंकवादी लिखा गया है।देश में महात्मा गांधी से अटल बिहारी वाजपेयी, अब्दूल कलम आजाद तक के लेखों , कविताओं को सरकार द्वारा प्रकाशित कर दिया गया है। लेकिन सरकार ने कभी भगत सिंह के लेखों को प्रकाशित करने की कोशिश नही की। आज भी उसकी छवि कई लोगों के में इतनी ही है कि एक नौवाजवान ने जोश में देश के लिए बलिदान दे दिया।
लेकिन भगत सिंह ने जो भी लेख लिखे थे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब। क्या आप उसके विचारों को जानना चाहते हैं? यदि हाँ तो लिखिए किस विषय पर जानना चाहते यह अवश्य लिखिए। इस ब्लॉग पर उसके विचारों को उपलब्ध कराने की पुरी कोशिश की जायेगी।
Friday, September 26, 2008
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1 comment:
सुंदर सार्थक और सटीक आलेख बधाई
आपको मेरे चिट्ठे पर पधारने हेतु बहुत बहुत धन्यबाद . कृपया अपना आगमन नियमित बनाए रखें
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