Tuesday, October 21, 2008

तहलका का हिन्दी संस्करण बाजार में

तहलका का हिन्दी संस्करण बाजार में आ गया है। लंबे समय से इन्तजार था। बाजार में एक अच्छी हिन्दी पत्रिका की कमी थी। पत्रिका ८४ पेज की है। कीमत २० रूपये। थोड़ा ज्यादा है ना ? कवर स्टोरी में नानावती रिपोर्ट की चीर फाड़ है। पहला पेज पलटते ही मुंबई के नए गुंडे की फोटो है। रा.........ज का इंटरव्यू है। उसे हिटलर के विकास का तरीका पसंद है। भाई साहब इंटरव्यू आधा ही देकर चले गए। तरुण जी ने सम्पादकीय में अपने कारनामे (कारनामे ही तो हुए न !) गिनाये हैं । शीर्षक है 'किश्ती नई सफर वही '। तरुण जी ने अच्छी पत्रिका के प्रकाशन के लिए पाठकों का सहयोग सर्वोपरि बताया है। उनका मन्ना है ''हिन्दी पाठक जमीनी, सरोकारी, सतर्क और सक्रीय होते है'' । अरुंधती रॉय के इंटरव्यू के बगैर पहला अंक निकले आपको अच्छा नही लगेगा । जी हाँ उनका इंटरव्यू भी है। बॉलीवुड भी है लेकिन नए अंदाज में केटरीना कैफ से मुखातिब हुआ जा सकता है। अन्तिम पेज जरूर पढियेगा। व्यक्तिगत जीवन में लोकतान्त्रिक कैसे हुआ जा सकता इसका ज्ञान मिलेगा। कंटेंट पर ज्यादा नही लिखूंगा। आपके रूपये भी तो खर्च करवाने हैं ।

पत्रिका में २१ पेज विज्ञापन हैं । पत्रिका साज सज्जा में भी अच्छी है। बस कीमत थोड़ा कम होती तो अच्छा होता है। पत्रिका विक्रेता भी कह रहा था कीमत कम राखी होती तो अच्छा था। तरुण जी को समझना चाहिए था कि हिन्दी पाठक जमीनी होता है इसलिए उसके पास रोकडा पानी कम ही होता है। कीमत कम हो सके तो की जानी चाहिए। खैर हिन्दी पाठक सरोकारी भी होता है इसलिए खरीद ही लेगा। अंत में तहलका हिन्दी में उपलब्ध कराने के लिए तहलका टीम को धन्यवाद ..........................
हेमंत

Sunday, October 19, 2008

करोड़ों का सरकारी भुगतान नही किया निजी विमानन कंपनियों

हमारे देश में लोकतंत्र है। कानून की नजर में सब समान हैं। सभी को एक वोट देने का अधिकार है। सभी के लिए सरकार के एक ही नियम हें राजा हो या रंक। क्या सच में ऐसा है ? देश की सरकारी तेल कम्पनियाँ बार बार घाटे का हवाला देकर तेल की कीमत बढ़ातीं है या सब्सिडी समाप्त करने की बात करती हैं। क्या आपने किसी पैट्रोल पम्प पर जाकर कभी उधार तेल खरीदा है ? शायद नहीं। लेकिन हमारी तेल कंपनियाँ किंगफिशर जैसे कुछ लोगों कों बगैर भुगतान के ईंधन उपलब्ध कराती है।

घाटे में चल रही सार्वजनिक तेल कंपनियों को निजी विमानन कंपनियों ने १,१०,000 करोड़ उपाए का भुगतान करना है।

किंगफिशर ने ही ८३९ करोड़ रूपये भुगतान करना है।
इसमें इंडियन आयल का १०० करोड़ , हिन्दुस्तान पेट्रोलियम का ४५० करोड़ और भारत पेट्रोलियम का २८९ करोड़ का बकाया शामिल है ।
jet एयरवेज ने ४४६ करोड़ रूपये भुगतान करना है।

इससे अनुमान लगाया जा सकता है की हमारे सार्वजनिक संस्थान घाटे में क्यों जा रहे हैं।

जैसा की ये कम्पनियाँ अब घाटे का रोना रो रही हैं कहा जा सकता है की सरकार इनकी ये बकाया राशिः माफ़ कर देगी। है न शर्मनाक तथ्य। क्या लोकतंत्र में कुछ लोगों को विशेषाधिकार प्राप्त होना चाहिए । आप कहेंगे नही पर ऐसा हो क्यों रहा है ?

Thursday, October 16, 2008

........लेकिन धनी भिखारी बड़े कंजूस होते है।

छंटनी ........ छंटनी .....
एयरलाइंस में यात्रा करते सवारियों को मुस्कराकर लजीज व्यंजन परोसने वाली एयरहोसतेजस के मुरझाये हुए हुए चेहरे आज सभी समाचार पत्रों में प्राकशित हैं। इनके चेहोरो पर मजबूत भारतीय अर्थव्यस्था का प्रतिबिम्ब स्पष्ट दिखायी दे रहा है। २०२० तक विकसित भारत का सपना देख रही इन सैकडों बालाओं को कल जेट एयरवेज ने कह दिया की ''अब आप हमारी कंपनी के लिए अतिरिक्त जनसँख्या हैं'' । कंपनी के मालिक नरेश गोयल हाल ही में किंगफिशर के मालिक और राज्यसभा संसद विजय माल्या जी के दोस्त बने है। यहाँ में माल्या जी का नाम इसलिए घसीट रहा हूँ क्योंकि में उन्हें हमेशा ही सुंदर - सुंदर बालाओं के साथ चित्र खिंचाते हुए देखता हूँ लेकिन आज उनके ही उद्योग से जुड़ीं लड़कियों के इर्दगिर्द नही दिखाई दिए। बल्कि गोयल जी ने माल्या जी से दोस्ती करते ही सैकडों लोगों को रोजगार से निकाल दिया।
अब सीधे - सीधे पते की बात पर आया जाए। जेट ने १९०० कर्मचारियों को नोकरी से निकाल दिया है। हाल ही में किंगफिशर ने भी ३०० कर्मचारियों को नोकरी से निकाला था। कंपनी का कहना है की मंदी के कारण उसे ऐसा फ़ैसला लेना पड़ रहा है। जैसा की आप लोग जानते है हमारे देश के उद्योगपति एक किस्म के समाज सेवक भी हैं समाज सेवक होने के नाते उनका कहना है की शेष १११०० कर्मचारियों की नोकरी बचाने के लिए हमने ऐसा किया। कितनी चिंता है इनको लोगों की ! संकट में भी कर्मचारियों का खियाल ! दूसरी और नागरिक उड्डयन मंत्री जो जनता के वोटों से चुने गए इस छटनी पर हक्षतेप करने से साफ़ इनकार कर दिया है। साथ में नरेश गोयल जी और विजय माल्या जी को संकट से उभारने के लिए ५००० करोड़ के बेलाउट का प्रस्ताव दे दिया है। कैसी विडम्बना है हमारे लोकतंत्र की।
खैर में अपनी बात पर आता हूँ । पहली बात तो सरकार को सीधे - सीधे छंटनी पर हक्षतेप करना चाहिए। यदि सरकार छंटनी रोकने में असफल होती है तो बेलआउट कर्मचारियों के लिए दिया जाना चाहिए। करमचारियों को पुनः रोजगार मिलने तक उनकी आजीविका की व्यस्था सरकार को करनी चाहिए। लेकिन सरकार उल्टा उन लोगों को रूपया दे रही है जो लोगों का रोजगार छीन रहे है और जिनके पास पहले से ही अरबों रूपया है। उद्योग जगत इस प्रस्ताव का स्वागत कर रहा है। कैसा दोगला है यह उद्योग जगत एक तरफ़ खुले बाजार और सरकार के हक्षतेप को कम करने की बात करता है दूसरी तरफ़ स्वयं के लिए सरकार से करोड़ों के आर्थिक पॅकेज की मांग समय - समय पर करता है। थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए की एयरलाइंस घाटे में चल रहे हो लेकिन अन्य बिजनेस में तो ये पैसा ही पैसा कम रहे हैं। उदहारण के लिए माल्या जी लोगों को शराब पिला - पिला कर करोड़ों कमा रहे हैं। हाँ यदि अपने आकलन से ज्यादा कमाने पर इन्होने अपनी अतिरिक्त इनकम सरकार को दी होती तो इस पर सोचा जा सकता था। लेकिन धनी भिखारी बड़े कंजूस होते है। लोकतंत्र में हजारों लोगों की कीमत पर कुछ लोगों को बेलआउट देना शर्मनाक ही नही अक्षम्य अपराध है। इसलिए बेलआउट कंपनियों को नही आम लोगों को दिया जाना चाहिए। बेलआउट नरेश गोयल या विजय माल्या के लिए नही बल्कि उन एयरहोस्टेज के लिए दिया जाए जिन के मुरझाते चेहरे अखबार में प्रकाशित हैं ताकि उनकी मुस्कराहट वापस आ सके।
हेमंत

Thursday, October 9, 2008

चिदंबरम साहब का overconfidence

वैश्विक आर्थिक संकट और भारत
विश्व की महाशक्ति अमेरिका का आर्थिक संकट पुरी दुनिया को अपने आगोश में लेता जा रहा है। दुनिया भर के शेयर बाजार लगातार रसातल की और जा रहे हैं। विकसित देशों के बैंक सरकारी बैलआउट की संजीवनी के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद देश के वित्त मंत्री पी चिदंबरम, वाणिज्य मंत्री कमल नाथ और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहूलवालिया ने भारतीय अर्थव्यस्था पर अडिग विश्वाश व्यक्त करते हुए कहा है की वैश्विक संकट का असर भारत पर नही पढेगा, शेयर बाजार में जल्द सुधार होगा।लेकीन इनका यह औवर्कांफिदैंस बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कोई सकारात्मक प्रभाव नही डाल पाया। शेयर बाजार में गिरावट जारी रही और बाजार अपने दो वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गया यानी ११००० के अंक को छू गया स्थिति यह थी की बाजार से जुरे लोग तो इसके १०००० अंक तक पहुँचने का कयास लगाने लगे थे।
दूसरी और देश की प्रमुख कम्पनियाँ अपने आईपीओ लाने की योजना को स्थगित कर रही है। कई कंपनियों ने अपने उत्पादन को २० से २५ प्रतिशत तक कम कर दिया है। आई टी कम्पनिओं ने छंटनी शुरू कर दी है। जिस आई टी उद्योग के फलने फूलने के पीछे अजीज प्रेम जी और नारायण मूर्ती का लोहा माना जाता था, उनके रहते हुए ही इस सेक्टर में भारी तबाही की सम्भावना व्यक्त की जा रही है यानी इन दोनों की प्रतिभा की पोल खुलने वाली है। ये कम्पनियाय लीमन ब्रदर्स के साथ सालाना लगभग ७०० करोर का व्यवसाय करती थीं । फिक्की द्वारा किया गया अध्ययन स्पष्ट कहता है की ४४ प्रतिशा कंपनियों के मुनाफे में कमी आयेगी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह की दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बिल गेत्ट्स को यह कहना पढ़ा है की "वित्तीय संकट पूंजीवाद का अंत नही "। देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वयम फ्रांस और अमेरिका की यात्रा से वापस आने के बाद कहा था की "भारत भी इस संकट से अछूता नही रह सकता "। इसके बावजूद ये तीनों विद्वान भारत को इस संकट से बचा लेने का दावा कर रहे हैं। जबकि इसे १९२९ के बाद से सबसे बढ़ा संकट माना जा रहा है। जिसने पूरी दुनिया में तबाही मचाई थी। आज विश्व के देश और भी निकट आयें हैं। दुनिया को एक गाँव बनाने की कवायद शुरू (भूमंडलीकरण) होने के बाद यह सबसे बढ़ा आर्थिक संकट है। लेकिन इन विद्वानों का यह कहना की वैश्विक गाँव में आए तूफ़ान से हम बच जायेंगे हास्यास्पद है। ये कह रहे हैं हमारी अर्थव्यस्था मजबूत है जैसे की अमेरिका की अर्थव्यस्था बहुत कमजोर रही हो। शायद हम अमेरिका से ज्यादा मजबूत तो नही! इसलिए सपने बेचने के बजाय जमीन पर आकर देश को संकट से बचने का प्रयास कीजिये चिदंबरम साहब !

Wednesday, October 8, 2008

मैं उमेश जी और कॉम्मन मेन का आभारी हूँ.......

मुझे यह लिखते हुए बढ़ा हर्ष हो रहा है की मेरे पिछले पोस्ट "हिन्दुओं ने किया अपनी देवी से गैंग रैप" पर आए उमेश जी और कॉम्मन मेन के कमेन्ट ने मुझे सोचने की एक नयी द्रष्टि दी है। मैं सेकुलरिस्म और मानवीयता के चक्कर में अपना धर्म भूल गया था। खैर देर से ही सही मेरी आँखे खुली और इसमें कोई शक नही की इसका श्रेय इन दोनों महान विभूतियों को ही जाता है। जहाँ इसाई विदेशी धन से सीधे साधे, भोले भाले हिदुओं का धरम परिवर्तन कर रहे हैं वही मुस्लिम आतंकवादी हमारे राष्ट्र को बम ब्लास्ट कर kamjor कर रहे हैं। हमारी उदारता को इन लोगों ने हमारी कमजोरी मान लिया है। यही कारन है की पहले हमें मुस्लिमों ने फ़िर ब्रिटिश ईसाईयों ने गुलाम बनाया। कॉम्मन मेन ने सही ही याद दिलाया है की औरंगजेब ने कितने निर्दोष हिन्दुओं के सर काटे। यह याद कर के ही मेरा शरीर कांप रहा है। सोचो तब हमारे पूर्वजों ने कैसे दिन बिताये होंगे। आप दोनों सही कहते हैं हमें बदला लेना ही होगा भारत माता हमें पुकार रही है हमारे भगवान् हमारे पुकार रहे हैं बचाओ - बचाओ हिन्दुओं का अस्तित्व बचाओ हिन्दुओं के भगवान् का अस्तित्व बचाओ हम आज नही जागेतो आने वाली पीढी माफ़ नही करेगी।

बंधू आज से मैं भी आपके साथ हूँ। अब हम ब्याज सहित बदला चुकायेंगे। हाँ - हाँ चक्रब्रधी ब्याज सहित। इतिहास में हुए सारे अत्याचारों का हिसाब अब हमें चुका ही देना चाहिए। मैं कुछ और अत्याचार आपको याद दिलाना चाहूँगा, वैसे आप शायद जानते ही होंगे, फ़िर भी क्योंकि अत्याचारों का बदला लेने की आपकी मुहीम में भी अब शामिल हो ही चुका हूँ तो यह मेरा दायित्व बनता है। औरंगजेब तो हिन्दुस्तान में बहुत बाद में आया उससे पहले भी हमारा इतिहास रहा है। हिन्दुओं का गौरवमाय इतिहास। हाथों हाथ हमें यह भी निपटा देना चाहिए। में बात कर रहा हूँ दलितों और महिलाओं पर अत्याचार की। हमें बंगाल और राजस्थान में सती प्रथा के अंतर्गत जलाई गयी महिलाओं की सूची बनानी चाहिए। जितनी हिंदू महिलाएं जलाई गयीं अब हमें उतने ही हिंदू पुरुषों को jalaana चाहिए। हमें हिन्दुस्तान में हुए दलित अत्याचार की सूची बनानी चाहिए और जहाँ - जहाँ दलितों पर अत्याचार हुए वहां - वहां अब सवर्णों से बदला लेना चाहिए। जहाँ दलितों पर kore मारे गए अब वहां सवर्ण को मार कर जहाँ दलितों की हत्या की गयी .........शायद आप मेरी बात समझ गए होंगे। मेरे कहने का मतलब हमें बदला लेना पीछे से बिल्कुल पीछे से प्रारम्भ करना चाहिए। मुझे उम्मीद है इस सब में आप मेरा साथ अवस्य लेंगे मैं ऐसे पुन्य कार्य में जीवन भर आप के साथ हूँ। आप ने मेरे ब्लॉग पर कमेन्ट कर मेरा ज्ञान वर्धन किया मैं आपका बहुत - आभारी हूँ। आशा है आप आगे भी मुझे ज्ञान देते रहें।

Monday, October 6, 2008

हिन्दुओं ने किया अपनी देवी से गैंग रैप....

(उदारता की अनोखी मिशाल )

हिंदू धर्म दुनिया का सबसे उदार! और लचीला ! धर्म है। कट्टरता से इसका कोई नाता नहीं : अतिथि देवो भव: निति पर यह विशवाश करता है और इसका अन्तिम लक्ष्य ''बसुधैव कुतुम्कम है। आजकल हिंदू नवरात्री का त्यौहार मना रहे हैं। नवें दिन ९ कन्याओं को भोजन कराकर कन्या कुमारी पूजन किया जाएगा। चूँकि हिंदू स्त्री को देवी का रूप मानते हैं इसलिए उसकी पूजा अर्चना करना इनकी परम्परा रही है। चाहे वह कन्या पूजन के रूप में हो या पूर्व में विधवा स्त्री को जिन्दा जलाकर सीधे उसके दिवंगत पति के पास भेजने के रूप में।


नारी पूजन के मध्य हिन्दुओं की उदारता को प्रदशित करती एक ख़बर उरीशा से आयी है। उरीशा के बारगढ़ जिले में हिंदू दंगाइयों (भक्तों ) ने २० साल की एक लडकी से गैंग रैप कर उसे जिन्दा जलाकर मार डाला । ख़बर के अनुसार रजनी माझी नाम की एक लडकी चर्च संचालित अनाथालय में काम करती थी। २५ अगस्त को बजरंग बली के भक्तों के संगठन बजरंग दल और हिन्दुओं के संगठन विश्व हिंदू परिषद् (वी एच पी ) की अगुवाई में चर्च पर हमला किया गया। वहां एक लडकी मिली (पढ़ें देवी ) हिंदू दंगाइयों ने उसे इसाई समझकर उसके साथ गैंग रैप किया और जिन्दा जला दिया। इस प्रकार हिन्दुओं ने एक बार फ़िर अपनी उदारता का परिचय दिया। इस घटना पर धार्मिक विश्लेषकोंका कहना है की इसे हिन्दुओं में आ रही जाग्रति के रूप में देखा जाना चाहिए। हिंदू धीरे - धीरे जाग्रत हो रहें हैं और देश व् भारत माता के प्रति अपने क्रत्व्यों को समझ रहे हैं। हिन्दुओं को उनकी उदारता के कारण सदियों से दबाया गया लेकिन अब वे दिन प्रति दिन शक्तिशाली होते जा रहे आज उनके पास "हिंदू परमाणु बम" है। आज का हिंदू जाग रहा है और गर्व से नारा लगा रहा है " मुझे हिंदू होने पर गर्व है"।

Wednesday, October 1, 2008

एक अरब लोग भूख से मरेंगे !

वैश्विक आर्थिक मंदी ने अपना असर तेजी से दिखाना प्रारम्भ कर दिया है। अमेरिका की बढ़ी - बढ़ी कम्पनियाँ धाराशायी हो रही हैं। विश्व के शेयर बाजार लगातार गिर रहे हैं। इस कारण से बाजार में निवेश करने वाले कई छोटे निवेशक आत्महत्या कर रहे हैं। यह संकट आने वाले समय में भयावह रूप लेने वाला है। इसी को व्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ की सहस्राब्दी विकास लक्ष्य रिपोर्ट २००८ आयी है। रिपोर्ट में कहा गया है की विश्व में जारी संकट, खाद्य वस्तु और इंधन की आसमान छूती कीमतें आने वाले समय में १० करोड़ लोगों को गरीबी में धकेलेगी, १ अरब लोग भूख से मरेंगे और २ अरब लोग कुपोषण के शिकार होंगे। इसका सबसे बुरा असर अफ्रीका के उप सहारा क्षेत्रों और दक्षिणी एशिया में पढने वाला है।जहा की स्थिती पहले से ही दयनीय है। रिपोर्ट में विकाशशील देशों की स्थिती के कुछ बिन्दु ........
  1. एक चौथाई बच्चे औसत से कम भार के हैं
  2. पॉँच लाख माएं बच्चे को जन्म देने के दौरान मर जाती हैं।
  3. दक्षिण एशिया की आधी आबादी २.५ अरब लोग स्वच्छता सुविधाओं के आभाव में रह रहे हैं।
  4. एक तिहाई से अधिक आबादी झोपढ़पत्तियों में रहती हैं।

यह हैं एशिया की स्थिति जहाँ विश्व की तेजी से बढ़ती दो आर्थिक शक्तियां भारत और चीन हैं। इस आर्थिक विकास में गरीबी मिटाने के लिए कोई स्थान नही हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट में चिंता बढ़ाने वाली बात यह हैं की आर्थिक संकट से उसका गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम प्रभावित हो रहा हैं। जब इतनी बढ़ी संस्था गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम चलाने में सक्षम नही हैं तो निश्चित रूप से आने वाला समय रिपोर्ट के आकलन से भी भयावह हो सकता है।